खून की एक बूँद
मिली है उस नीली स्याही में
जिसकी कलम से
लिख रहा हूँ मैं |
नज़र नहीं आती उन्हें
वो लालिमा
शायद उन शब्दों में दिख जाएँ -
वे सन्दर्भ
जो लिखे हैं मैंने
हर शब्द
हर पन्ने में
मेरे हों -
है यही कोशिश मेरी,
पर क्यूँ
कुछ शब्द
यूँ
अनायास ही आ जाते हैं |
ये गलती -
क्या उस 'बूँद' की है
या इस भूगोल की ?
या चाहता है
वो रचनाकार
एक नई--
कृति |
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आपकी ये 'कृति' हमें काफी ख़ूबसूरत लगी. :)
ReplyDelete:)...dhanyawad !
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