काश...
मेरा घर
होता किसी नदिया तीरे
पीपल के पास
मंदिर से कुछ दूर
सुबह शाम कानों को छूती
वो घंटियों की टन-टन-आहट
वो पवन में घुली
मद्धम-मद्धम धूप की सुगंध
ओSम शान्तिः |
शान्तिः ||
शान्तिः |||